Read Current Affairs
स्थान: नव-निर्मित 'कर्तव्य भवन', नई दिल्ली
प्रस्तुतकर्ता: केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री
मुख्य दर्शन: विकसित भारत @ 2047
प्रस्तावना एवं वैचारिक आधार
केंद्रीय बजट 2026-27 न केवल एक वित्तीय विवरण है, बल्कि यह भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प का रोडमैप है। इस बजट को 'युवा शक्ति-संचालित बजट' कहा गया है। यह बजट तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है:
- द्विधा के ऊपर कार्रवाई (Action over Ambivalence)
- बयानबाजी के ऊपर सुधार (Reform over Rhetoric)
- लोकलुभावनवाद के ऊपर लोग (People over Populism)
मार्गदर्शक 'तीन कर्तव्य'
बजट का संचालन तीन विशिष्ट कर्तव्यों के माध्यम से किया गया है:
- आर्थिक विकास को गति प्रदान करना: वैश्विक अस्थिरता के बीच घरेलू उत्पादकता और लचीलेपन को मजबूत करना।
- आकांक्षाओं की पूर्ति: नागरिकों और युवाओं की क्षमता का निर्माण कर उन्हें विकास का भागीदार बनाना।
- सबका साथ, सबका विकास: यह सुनिश्चित करना कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर (Last Mile) तक पहुंचे।
प्रथम कर्तव्य: आर्थिक विकास एवं रणनीतिक क्षेत्र
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए सात 'अग्रणी क्षेत्रों' को चिन्हित किया गया है:
- बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI) मिशन
- उद्देश्य: भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाना।
- निवेश: अगले 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय।
- रणनीति: बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर पर ध्यान। इसके अंतर्गत 3 नए NIPER संस्थानों की स्थापना और 7 मौजूदा संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा। साथ ही, CDSCO को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत किया जाएगा।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- इसका उद्देश्य भारत की 'तकनीकी संप्रभुता' को सुरक्षित करना है।
- यह केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर उपकरणों और सामग्रियों के निर्माण पर भी केंद्रित है।
- इसमें उद्योग के नेतृत्व वाले आरएंडडी (R&D) और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना का प्रस्ताव है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और महत्वपूर्ण खनिज
- इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण: इस योजना का बजट ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया गया है।
- दुर्लभ मृदा कॉरिडोर: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में खनन और प्रसंस्करण के लिए कॉरिडोर स्थापित होंगे।
- केमिकल पार्क: आयात निर्भरता घटाने के लिए 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल पर तीन केमिकल पार्कों का निर्माण।
- विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स
- कंटेनर निर्माण योजना: घरेलू लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ का आवंटन।
- कपड़ा क्षेत्र: एकीकृत कपड़ा कार्यक्रम के तहत 'मेगा टेक्सटाइल पार्क' और 'टेक्स-इको' जैसी पहल शुरू की गई हैं।
- ग्राम स्वराज: महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के जरिए खादी और हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाएगा।
- MSME और चैंपियन फर्म्स
- SME ग्रोथ फंड: ₹10,000 करोड़ का समर्पित फंड जो उच्च क्षमता वाले छोटे उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
- स्व-निर्भर भारत फंड: इसमें ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश। 'कॉर्पोरेट मित्र' की नई अवधारणा के तहत बड़े उद्योग छोटे उद्यमों को मेंटरशिप देंगे।
बुनियादी ढांचा: विकास के संयोजक : सरकार बुनियादी ढांचे को आर्थिक गति का मुख्य इंजन मानती है।
- हाई-स्पीड रेल (HSR): सात प्रमुख कॉरिडोर का विकास किया जाएगा:
- मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी, और वाराणसी-सिलिगुड़ी।
- जलमार्ग और तटीय शिपिंग
- अगले 5 वर्षों में 20 राष्ट्रीय जलमार्गों को सक्रिय किया जाएगा।
- सड़क और रेल से माल ढुलाई का भार जलमार्गों पर स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि जलमार्गों की हिस्सेदारी 2047 तक 12% हो सके।
- सीप्लेन VGF योजना: पर्यटन और दुर्गम क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिए स्वदेशी सीप्लेन विनिर्माण को बढ़ावा।
- शहरी आर्थिक क्षेत्र (CER)
- शहरों को उनके विकास के कारकों (Growth Drivers) के आधार पर मैप किया जाएगा।
- प्रत्येक CER को 5 वर्षों में ₹5,000 करोड़ का अनुदान 'चैलेंज मोड' के आधार पर दिया जाएगा।
द्वितीय कर्तव्य: आकांक्षाएं और क्षमता निर्माण
- ऑरेंज इकोनॉमी (AVGC)
- एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स के क्षेत्र में कौशल विकास के लिए 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी।
- स्वास्थ्य और खेल
- मेडिकल वैल्यू टूरिज्म: निजी क्षेत्र के सहयोग से 5 क्षेत्रीय चिकित्सा हब बनाए जाएंगे, जिनमें आयुष केंद्र और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स एक साथ होंगे।
- खेलो इंडिया मिशन: खेल विज्ञान और बुनियादी ढांचे के एकीकरण के माध्यम से ओलंपिक स्तर की प्रतिभा तैयार करना।
- शिक्षा में लैंगिक समानता
- STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) विषयों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले में गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना हेतु पूंजीगत सहायता।
तृतीय कर्तव्य: समावेशी विकास (सबका साथ, सबका विकास)
- डिजिटल कृषि क्रांति
- भारत-VISTAAR: यह एक बहुभाषी AI प्लेटफॉर्म है। यह एग्रीस्टैक और ICAR के डेटा का उपयोग करके किसानों को उनकी मिट्टी और मौसम के अनुसार व्यक्तिगत सलाह देगा।
- महिला सशक्तिकरण
- SHE Marts: स्वयं सहायता समूहों (SHG) के उत्पादों को बाजार देने के लिए क्लस्टर स्तर पर समुदाय-स्वामित्व वाले 'SHE Marts' स्थापित होंगे।
- सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास
- मानसिक स्वास्थ्य: NIMHANS-2 की स्थापना और क्षेत्रीय संस्थानों का उन्नयन।
- पूर्वोदय योजना: उत्तर-पूर्व में 'बुद्ध सर्किट' का विकास और 'ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' के माध्यम से पश्चिम बंगाल और अन्य पूर्वी राज्यों का औद्योगिकीकरण।
कर सुधार एवं नीतिगत परिवर्तन
- प्रत्यक्ष कर
- आयकर अधिनियम 2025: 1961 के पुराने कानून की जगह नया, सरल और आधुनिक कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
- TCS और TDS: विदेशी टूर पैकेज पर TCS को घटाकर 2% किया गया। TDS भुगतान में चूक (वस्तु के रूप में भुगतान पर) को अब 'अपराध' की श्रेणी से बाहर किया गया है।
- पूंजीगत लाभ (Capital Gains): शेयर बायबैक पर अब शेयरधारकों के हाथ में टैक्स लगेगा, जिससे कंपनियों पर कर का बोझ कम होगा।
- अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क
- सीमा शुल्क में कटौती: व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात पर शुल्क 20% से घटकर 10% हुआ।
- स्वास्थ्य सेवा: 17 कैंसर दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के खाद्य उत्पादों पर सीमा शुल्क में पूर्ण छूट।
- रणनीतिक प्रोत्साहन: डेटा सेंटर्स के लिए 2047 तक 'टैक्स हॉलिडे'। लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण उपकरणों पर शुल्क से राहत।
समष्टि आर्थिक आंकड़े
मद | बजट अनुमान (BE) 2026-27 |
राजकोषीय घाटा | 4.3% (GDP का) |
पूंजीगत व्यय (Capex) | ₹12.2 लाख करोड़ |
प्रभावी पूंजीगत व्यय | ₹17.1 लाख करोड़ |
सांकेतिक (Nominal) GDP वृद्धि | 10.5% |
वास्तविक (Real) GDP वृद्धि | ~7.0% |
ऋण-जीडीपी अनुपात | 55.6% (लक्ष्य: 2030 तक 50%) |
चुनौतियां और आलोचनात्मक विश्लेषण
बजट जहां एक ओर विजनरी है, वहीं विशेषज्ञ कुछ चिंताओं की ओर भी इशारा करते हैं:
- उपभोग की कमी: बजट निवेश (Supply-side) पर केंद्रित है, लेकिन निजी उपभोग (Demand-side) जो जीडीपी का 60% है, अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में सुस्त है।
- रोजगार का मुद्दा: उच्च-तकनीकी विनिर्माण (Semiconductor, Biopharma) पूंजी-प्रधान होते हैं, श्रम-प्रधान नहीं। इससे 'रोजगार विहीन विकास' का जोखिम हो सकता है।
- राजस्व की अनिश्चितता: आयकर और जीएसटी संग्रह में किसी भी बड़ी कमी से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बजट में कटौती करनी पड़ सकती है।
- रणनीतिक चिंता: चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए बजट में स्पष्ट आवंटन न होना भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए चुनौती बन सकता है।
निष्कर्ष एवं भविष्य की राह
- बजट 2026-27 राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए भारत को एक तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। इसकी सफलता मुख्य रूप से 'व्यय की गुणवत्ता' और 'योजनाओं के निष्पादन' पर निर्भर करेगी। यदि 'भारत-VISTAAR' और 'SME ग्रोथ फंड' जैसी योजनाएं सही ढंग से लागू होती हैं, तो यह ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच के अंतर को पाटने में सफल होगा।
परिशिष्ट: बजट का ऐतिहासिक एवं संवैधानिक संदर्भ
- अनुच्छेद 112: संवैधानिक रूप से बजट को 'वार्षिक वित्तीय विवरण' कहा जाता है।
- बजट के चरण: प्रस्तुति -> सामान्य चर्चा -> समितियों द्वारा जांच -> अनुदान की मांग पर मतदान -> विनियोग विधेयक -> वित्त विधेयक।
- ऐतिहासिक तथ्य: भारत का पहला बजट 1860 में आया; स्वतंत्र भारत का 1947 में। 1991 के बजट ने भारत में उदारीकरण (LPG) की शुरुआत की।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026-27 राजकोषीय अनुशासन और आधुनिक औद्योगिक क्रांति के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी कुशलता से होता है और यह "अंतिम मील" तक विकास कैसे पहुँचाता है।
सामान्य अध्ययन पेपर – II शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ:
परमाणु हथियारों के नियंत्रण का इतिहास शीत युद्ध की विभीषिका से जुड़ा है। 1962 के 'क्यूबा मिसाइल संकट' के बाद दुनिया ने समझा कि परमाणु युद्ध का कोई विजेता नहीं होता। इसके बाद अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच परमाणु आयुधों को कम करने के लिए समझौतों की एक श्रृंखला शुरू हुई। 1972 की SALT (सामरिक शस्त्र सीमा वार्ता) से लेकर 1991 की START-I संधि तक, दोनों महाशक्तियों ने अपने विनाशकारी हथियारों की संख्या को सीमित करने का प्रयास किया।
न्यू-START संधि क्या है?
'न्यू स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी' (New START) अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली अंतिम प्रभावी संधि थी।
- हस्ताक्षर: 2010 (प्रग, चेक गणराज्य) में बराक ओबामा और दमित्री मेदवेदेव द्वारा।
- लागू: 05 फरवरी 2011
- प्रमुख सीमाएँ: तैनात परमाणु वारहेड्स की संख्या 1,550 तक सीमित।
- तैनात मिसाइलों और बमवर्षकों की संख्या 700 तक सीमित।
- ऑन-साइट निरीक्षण और डेटा साझाकरण की सख्त व्यवस्था।
चर्चा में क्यों?
05 फरवरी 2026 को इस संधि की अंतिम समय सीमा समाप्त हो गई है।
- निलंबन का इतिहास: रूस ने फरवरी 2023 में ही यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप के कारण इस संधि में अपनी भागीदारी को "निलंबित" कर दिया था।
- वर्तमान स्थिति: संधि के विस्तार के लिए कोई नया समझौता नहीं हो पाया। अमेरिकी प्रशासन (ट्रंप शासन) ने इस संधि में चीन को भी शामिल करने की शर्त रखी थी, जिसे चीन ने यह कहकर ठुकरा दिया कि उसका परमाणु शस्त्रागार अमेरिका और रूस की तुलना में बहुत छोटा है।
- रूसी प्रस्ताव: राष्ट्रपति पुतिन ने इसे एक वर्ष और बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन आपसी अविश्वास के कारण कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
न्यू START का महत्व
यह संधि वैश्विक परमाणु स्थिरता की 'अंतिम सुरक्षा दीवार' थी।
- पारदर्शिता: यह संधि दोनों देशों को एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देती थी, जिससे "गलतफहमी" के कारण होने वाले युद्ध का खतरा टल जाता था।
- स्थिरता: इसने एक ऐसी प्रणाली बनाई थी जहाँ कोई भी पक्ष अचानक से अपने हथियार बढ़ाकर दूसरे को चौंका नहीं सकता था।
समाप्ति का प्रभाव और बहुध्रुवीय विश्व की ओर झुकाव
संधि की समाप्ति एक 'परमाणु शून्य' पैदा करती है।
- दो ध्रुवीय से बहुध्रुवीय: शीत युद्ध के दौरान केवल दो महाशक्तियाँ थीं। अब चीन एक बड़ी परमाणु शक्ति के रूप में उभर रहा है। न्यू START के खत्म होने से रूस और अमेरिका अब अपने हथियारों की संख्या बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं, जो चीन को भी उकसाएगा।
- असुरक्षा का माहौल: रूस-अमेरिका संबंध अपने सबसे खराब दौर (Ukraine/NATO विवाद) में हैं। बिना किसी कानूनी बाध्यता के, दुनिया "अनियंत्रित हथियार दौड़" (Arms Race 2.0) की ओर बढ़ सकती है।
भारत का दृष्टिकोण और महत्व
भारत के लिए यह खबर चिंता और जिम्मेदारी दोनों का विषय है:
- क्षेत्रीय सुरक्षा: यदि वैश्विक स्तर पर हथियारों की दौड़ बढ़ती है, तो चीन अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाएगा, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा पर पड़ेगा।
- नैतिक पक्ष: भारत हमेशा से 'सार्वभौमिक और भेदभाव रहित परमाणु निरस्त्रीकरण' का पक्षधर रहा है। भारत इसे वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा झटका मानता है।
- रणनीतिक अवसर: भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में दुनिया को 'नो फर्स्ट यूज़' जैसी नीतियों पर चलने के लिए प्रेरित कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
- संयुक्त राष्ट्र (UN): महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे 'गंभीर क्षण' बताया है। उनके अनुसार, "दशकों की उपलब्धियों का यह विघटन परमाणु जोखिम को उच्चतम स्तर पर ले गया है।"
- यूरोपीय देश: नाटो और यूरोपीय संघ के देश अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि रूस अब अपनी मिसाइलें तैनात करने के लिए किसी संधि से बंधा नहीं है।
विश्लेषण
न्यू START का अंत केवल एक कागजी समझौते का अंत नहीं है, बल्कि उस 'सामरिक विश्वास' का अंत है जिसे बनाने में आधी सदी लगी। वर्तमान भू-राजनीति में अमेरिका अब केवल रूस नहीं, बल्कि चीन-रूस-ईरान-उत्तर कोरिया के गठबंधन को चुनौती मान रहा है। ऐसे में एक 'द्विपक्षीय' संधि की प्रासंगिकता अमेरिका के लिए कम हो गई थी। हालांकि, बिना किसी नियंत्रण के परमाणु हथियारों का होना पूरी मानवता के लिए 'आत्मघाती' है।
आगे की राह
- त्रिपक्षीय वार्ता: भविष्य में किसी भी संधि में अमेरिका, रूस के साथ-साथ चीन का होना अनिवार्य है।
- तकनीकी नियंत्रण: एआई (AI) और साइबर सुरक्षा को परमाणु नियंत्रण समझौतों का हिस्सा बनाना होगा।
- विश्व जनमत: मध्यम और छोटी शक्तियों को मिलकर महाशक्तियों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे फिर से वार्ता की मेज पर लौटें।
निष्कर्ष
न्यू START की समाप्ति दुनिया को एक अनिश्चित और खतरनाक रास्ते पर खड़ा करती है। यह वह समय है जब दुनिया बहुध्रुवीय हो रही है, लेकिन परमाणु नियंत्रण के नियम अभी भी पुराने ढर्रे पर हैं। शांति के लिए केवल संधियाँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रों के बीच उस अविश्वास को कम करना होगा जो हथियारों के संचय की जननी है।
संदर्भ
गाजा पट्टी में पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जारी संघर्ष ने एक अभूतपूर्व मानवीय संकट को जन्म दिया है। अक्टूबर 2023 में शुरू हुई शत्रुता के बाद से, गाजा की सीमाएँ पूरी तरह से सील कर दी गई थीं। फरवरी 2026 में, अंतरराष्ट्रीय दबाव और एक नाजुक युद्धविराम के बीच, गाजा की बाहरी दुनिया से जुड़ने वाली एकमात्र गैर-इजरायली सीमा 'रफह क्रॉसिंग' को आंशिक रूप से खोलने का निर्णय लिया गया है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
रफह क्रॉसिंग क्या है?
रफह क्रॉसिंग गाजा पट्टी के सबसे दक्षिणी बिंदु पर स्थित है और यह मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप के साथ गाजा की एकमात्र सीमा साझा करता है।
- विशिष्टता: यह गाजा की एकमात्र ऐसी सीमा है जो सीधे इजरायल में नहीं खुलती।
- महत्व: यह गाजा के 20 लाख से अधिक निवासियों के लिए भोजन, चिकित्सा और मानवीय सहायता प्राप्त करने का मुख्य द्वार है। ऐतिहासिक रूप से, यह फिलिस्तीनियों की आवाजाही और व्यापार के लिए एक 'लाइफलाइन' (जीवनरेखा) रही है।
चर्चा में क्यों?
2 फरवरी 2026 को रफह क्रॉसिंग को एक वर्ष से अधिक समय के बाद पुनः संचालित किया गया है। वर्तमान स्थिति के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सीमित आवाजाही: इजरायल द्वारा प्रतिदिन केवल 50 फिलिस्तीनियों को आने-जाने की अनुमति दी गई है, और वह भी केवल 'पैदल' मार्ग से।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: यूरोपीय संघ (EU) इस क्रॉसिंग की निगरानी कर रहा है, जबकि इजरायली सुरक्षा बल लौटने वाले निवासियों की कड़ी स्क्रीनिंग और पहचान प्रक्रिया का संचालन कर रहे हैं।
- युद्धविराम और हिंसा का विरोधाभास: क्रॉसिंग खुलने के दौरान ही यह खबर आई कि युद्धविराम के बावजूद हवाई हमलों में 30 फिलिस्तीनी मारे गए, जिससे शांति की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
रफह क्रॉसिंग का महत्व
इसके महत्व को तीन श्रेणियों में समझा जा सकता है:
- मानवीय महत्व: गाजा के भीतर स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कैंसर, गुर्दे की बीमारियों और युद्ध में घायल हुए हजारों मरीजों (लगभग 18,500) के लिए विदेश में उपचार हेतु यह एकमात्र रास्ता है।
- रणनीतिक महत्व: यह क्रॉसिंग गाजा पर इजरायल के पूर्ण घेराबंदी (के प्रभाव को कम करने का एकमात्र साधन है।
- राजनयिक महत्व: यह मिस्र, इजरायल, अमेरिका और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के बीच जटिल कूटनीति का केंद्र है।
प्रभाव
- सकारात्मक प्रभाव: सीमा खुलने से आवश्यक मानवीय आपूर्ति (भोजन, ईंधन, और पोषण किट) की आवक बढ़ी है। चिकित्सा निकासी शुरू होने से अहमद और यूसुफ जैसे गंभीर रूप से बीमार बच्चों में स्वस्थ होने की आशा जगी है।
- नकारात्मक प्रभाव: आवाजाही पर अत्यधिक प्रतिबंध (प्रतिदिन मात्र 50 व्यक्ति) और सुरक्षा की अनिश्चितता ने गाजा के नागरिकों में 'अत्यधिक घबराहट' पैदा की है। यह सीमित पहुंच मानवीय जरूरतों के मुकाबले नगण्य है।
विश्लेषण
इस घटनाक्रम का विश्लेषण दर्शाता है कि रफह क्रॉसिंग का खुलना केवल एक 'मानवीय रियायत' नहीं बल्कि एक 'भू-राजनीतिक सौदेबाजी' का हिस्सा है।
- ट्रंप शांति योजना: यह विकास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना के कार्यान्वयन की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
- इजरायल की सुरक्षा चिंताएं बनाम मानवीय अधिकार: इजरायल का दावा है कि कड़ी स्क्रीनिंग हथियारों की तस्करी रोकने के लिए आवश्यक है, जबकि मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि सामूहिक सजा और आवाजाही पर प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
- प्रभावी नियंत्रण: क्रॉसिंग भले ही खुल गई है, लेकिन इसका नियंत्रण अभी भी अंतरराष्ट्रीय और इजरायली सुरक्षा तंत्रों के बीच विभाजित है, जिससे संप्रभुता का मुद्दा जटिल बना हुआ है।
आगे की राह
- आवाजाही की सीमा बढ़ाना: 13,000 से अधिक घायलों की प्रतीक्षा सूची को देखते हुए दैनिक निकासी की संख्या को 50 से बढ़ाकर कम से कम 500-600 किया जाना चाहिए।
- स्वास्थ्य अवसंरचना का पुनरुद्धार: केवल मरीजों को बाहर भेजना समाधान नहीं है; गाजा के भीतर क्षतिग्रस्त अस्पतालों (जैसे अल-अमल और नासर अस्पताल) को पुनः संचालित करना अनिवार्य है।
- स्थायी युद्धविराम: मानवीय सहायता तभी प्रभावी होगी जब शत्रुता स्थायी रूप से समाप्त हो और मानवीय गलियारों को पूर्ण सुरक्षा प्राप्त हो।
- बहुपक्षीय निगरानी: यूरोपीय संघ के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को वितरण और सुरक्षा प्रक्रिया में अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष
रफह क्रॉसिंग का खुलना गाजा की अंधेरी सुरंग में प्रकाश की एक मंद किरण के समान है। जहाँ एक ओर चिकित्सा निकासी जीवन बचाने की उम्मीद देती है, वहीं दूसरी ओर हिंसा की निरंतरता और कड़े प्रतिबंध इस उम्मीद को धुंधला कर देते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि वह 'जीवन के अधिकार' को राजनीतिक हितों से ऊपर रखे। गाजा में शांति और स्थिरता तभी संभव है जब मानवीय पहुंच निर्बाध हो और शांति प्रक्रिया समावेशी हो।