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  • मोज़ाम्बिक की मानवाधिकार कार्यकर्ता और मानवतावादी ग्रासा माशेल (Graca Machel) को वर्ष 2025 के लिए 'इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार' के लिए चुना गया है।
  • इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को इसकी आधिकारिक घोषणा की।
  • पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाली एक अंतरराष्ट्रीय जूरी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय कार्यों (विशेष रूप से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में) में उनके परिवर्तनकारी योगदान के लिए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना है।

इस पुरस्कार की मुख्य बातें

  • पुरस्कार राशि: इसके तहत ₹1 करोड़ नकद, एक ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
  • ट्रॉफी की विशेषता: यह ट्रॉफी 'बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर' पत्थर से बनी है, जो लगभग 2,000 मिलियन वर्ष पुराना माना जाता है।
  • इतिहास: इस पुरस्कार की स्थापना 1986 में इंदिरा गांधी की स्मृति में की गई थी।

ग्रासा माशेल को क्यों चुना गया?

ग्रासा माशेल एक वैश्विक स्तर की राजनेता और कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने अपना जीवन वंचितों की आवाज उठाने में समर्पित कर दिया है:

  • शिक्षा में सुधार: मोज़ाम्बिक की पहली शिक्षा मंत्री (1975-1989) के रूप में उन्होंने स्कूल नामांकन दर को 40% से बढ़ाकर लड़कों के लिए 90% और लड़कियों के लिए 75% से अधिक किया।
  • बाल संरक्षण: 1990 के दशक में उन्होंने 'सशस्त्र संघर्ष का बच्चों पर प्रभाव' विषय पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक महत्वपूर्ण अध्ययन का नेतृत्व किया, जिसने युद्ध प्रभावित बच्चों के संरक्षण के वैश्विक नियमों को बदल दिया।
  • वैश्विक नेतृत्व: वह ' एल्डर्स' की संस्थापक सदस्य हैं और 'ग्रासा माशेल ट्रस्ट' के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए काम करती हैं।

ऐतिहासिक गौरव

ग्रासा माशेल के नाम एक अद्वितीय रिकॉर्ड हैवह दुनिया की एकमात्र महिला हैं जो दो अलग-अलग देशों की 'प्रथम महिला' (First Lady) रही हैं:

  1. मोज़ाम्बिक: राष्ट्रपति समोरा माशेल की पत्नी के रूप में।
  2. दक्षिण अफ्रीका: राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला की पत्नी के रूप में।

यह पुरस्कार उनके आत्म-शासन, सामाजिक न्याय और एक न्यायपूर्ण दुनिया बनाने के उनके आजीवन संघर्ष का सम्मान है।