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संदर्भ
भारत के घास के मैदानों से एक नन्हा जीव तेजी से विलुप्त हो रहा है, जिसे हम पिग्मी हॉग के नाम से जानते हैं। हालिया रिपोर्टों और 'पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम' (PHCP) के आंकड़ों के अनुसार, यह जीव अब केवल असम के कुछ सीमित क्षेत्रों तक सिमट कर रह गया है। पारिस्थितिकी तंत्र के लिए इसकी महत्ता को देखते हुए संरक्षणवादी इसे बचाने के लिए "मिशन मोड" में काम कर रहे हैं।
पिग्मी हॉग के बारे में: अद्वितीय विशेषताएं
- दुनिया में सबसे छोटा: यह दुनिया का सबसे छोटा और दुर्लभ जंगली सूअर है। एक वयस्क पिग्मी हॉग की ऊंचाई मात्र 25 सेमी (लगभग 10 इंच) होती है।
- इंजीनियर और निर्माता: यह उन गिने-चुने स्तनधारियों में से एक है जो अपना घर या 'घोंसला' खुद बनाता है, जिसमें घास की एक पूरी 'छत' भी होती है।
- संकेतक प्रजाति: पिग्मी हॉग की उपस्थिति उस क्षेत्र के घास के मैदानों के स्वास्थ्य का प्रमाण होती है। यदि पिग्मी हॉग सुरक्षित हैं, तो इसका अर्थ है कि वहां का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित है।
चर्चा में क्यों?
- पुनरुद्धार कार्यक्रम: जनवरी 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, 'पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम' (PHCP) ने अब तक लगभग 179 से अधिक बंधक-प्रजनित पिग्मी हॉग्स को असम के सुरक्षित क्षेत्रों में सफलतापूर्वक वापस छोड़ा है।
- अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) का खतरा: वर्तमान में इन जीवों पर 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' का बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनकी पूरी आबादी के नष्ट होने का डर है। प्रशासन इनके संरक्षण केंद्रों पर कड़ी 'बायो-सिक्योरिटी' लागू कर रहा है।
आवास और वर्तमान स्थिति
पिग्मी हॉग को नदी के किनारे वाले ऐसे घास के मैदान पसंद हैं जहाँ मानवीय हस्तक्षेप कम हो और जहाँ ऊँची व घनी घास (जैसे हाथी घास) मौजूद हो।
- वर्तमान ठिकाना: ऐतिहासिक रूप से यह हिमालय की तलहटी में उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक पाया जाता था, लेकिन वर्तमान में यह केवल असम के मानस और ओरांग राष्ट्रीय उद्यानों तक ही सीमित रह गया है।
पारिस्थितिक भूमिका
यह नन्हा जीव घास के मैदानों के लिए किसी 'माली' से कम नहीं है:
- मिट्टी का वातन: यह अपनी थूथन से जड़ों, कंदों और कीड़ों के लिए खुदाई करता है, जिससे मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है और उसकी गुणवत्ता में सुधार होता है।
- बीज प्रसार: यह विभिन्न जंगली फलों और बीजों को खाता है, जिससे बीजों के फैलाव और नई वनस्पतियों के उगने में मदद मिलती है।
संरक्षण स्थिति
पिग्मी हॉग को लुप्तप्राय होने से बचाने के लिए उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्राप्त है:
- IUCN रेड लिस्ट: अति संकटग्रस्त
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I यह भारत में किसी भी वन्यजीव को दी जाने वाली सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा है।
- CITES: परिशिष्ट-I
अस्तित्व पर मंडराते खतरे
- आवास का विनाश: कृषि और बस्तियों के लिए घास के मैदानों का लगातार कटना।
- अवैध चराई: मवेशियों द्वारा घास के मैदानों का अत्यधिक दोहन।
- घास जलाना: शुष्क मौसम में घास के मैदानों में अनियंत्रित आग लगाने से इनके घोंसले और जीवन नष्ट हो जाते हैं।
निष्कर्ष
पिग्मी हॉग केवल एक जानवर नहीं, बल्कि हमारे घास के मैदानों के स्वास्थ्य का "बैरोमीटर" है। यदि यह विलुप्त होता है, तो पूरा ग्रासलैंड इकोसिस्टम खतरे में पड़ जाएगा। कुड्डालोर या असम जैसे क्षेत्रों में चल रही संरक्षण पहलें यह दर्शाती हैं कि सामूहिक प्रयासों से हम इन 'अदृश्य नायकों' को विलुप्त होने की कगार से वापस ला सकते हैं।
विंग्स इंडिया 2026
'विंग्स इंडिया 2026' एशिया का सबसे बड़ा नागरिक उड्डयन कार्यक्रम है। इसका आयोजन नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और फिक्की (FICCI) के सहयोग से किया गया। यह आयोजन हैदराबाद के ऐतिहासिक बेगमपेट हवाई अड्डे पर 28 से 31 जनवरी, 2026 तक चला। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को दुनिया का प्रमुख विमानन हब बनाना और उद्योग के सभी हितधारकों को एक वैश्विक मंच प्रदान करना है।
वर्तमान समाचार और प्रमुख सुर्खियाँ
विंग्स इंडिया 2026 से जुड़ी हालिया और सबसे महत्वपूर्ण खबरें निम्नलिखित हैं:
- उद्घाटन सत्र: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि भारत अब विमानों का केवल खरीदार नहीं, बल्कि 'निर्माता' बनने की ओर अग्रसर है।
- रूस की भागीदारी: रूस ने अपने अत्याधुनिक विमानों SJ-100 और Il-114-300 का प्रदर्शन किया, जिससे भारत-रूस विमानन सहयोग के नए रास्ते खुले हैं।
- एयर इंडिया की बड़ी डील: एयर इंडिया ने 30 अतिरिक्त बोइंग नैरो-बॉडी विमानों का ऑर्डर देकर अपने कुल ऑर्डर को लगभग 600 विमानों तक पहुँचा दिया है।
- मेक इन इंडिया: 'शक्ति ग्रुप' और 'ओम्निपोल' ने 19-सीटर विमानों के भारत में निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
पुरस्कार वितरण: उत्तराखंड को मिला "सर्वश्रेष्ठ राज्य" का पुरस्कार
इस वर्ष के 'विंग्स इंडिया अवॉर्ड्स' में उत्तराखंड ने बाजी मारी:
- सम्मान: उत्तराखंड को “विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य” के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
- कारण: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने 'उड़ान' (UDAN) योजना को सफलतापूर्वक लागू किया, नए हेलीपोर्ट्स बनाए और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी को सुलभ बनाया।
- अन्य पुरस्कार: दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) को 'सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डा' का पुरस्कार मिला।
आयोजन की मुख्य बातें
- थीम: "भारतीय विमानन: भविष्य का मार्ग प्रशस्त करना – डिज़ाइन से तैनाती, विनिर्माण से रखरखाव, समावेशिता से नवाचार और सुरक्षा से स्थिरता तक।"
- एयरोबेटिक प्रदर्शन: भारतीय वायुसेना की 'सूर्य किरण' टीम और ब्रिटेन की 'मार्क जेफरीज ग्लोबल स्टार्स' टीम ने आसमान में रोमांचक करतब दिखाए।
- प्रदर्शन: आयोजन में लगभग 34 से अधिक विमानों और हेलीकॉप्टरों का 'स्टैटिक डिस्प्ले' किया गया।
- वैश्विक सहभागिता: 20 से अधिक देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
भविष्य का फोकस
विंग्स इंडिया 2026 ने भारतीय विमानन के लिए भविष्य की दिशा तय की है:
- MRO हब: भारत को विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना।
- स्थायित्व: 'सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल' (SAF) और ग्रीन एयरपोर्ट्स को बढ़ावा देकर कार्बन उत्सर्जन कम करना।
- एडवांस एयर मोबिलिटी (AAM): ड्रोन टैक्सी और इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ (eVTOL) विमानों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना।
- कौशल विकास: अगले 5 वर्षों में 115 से अधिक विमानन पेशेवरों को वैश्विक नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित करना।
निष्कर्ष:
विंग्स इंडिया 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय आसमान अब 'अनंत संभावनाओं' से भरा है और भारत वैश्विक विमानन क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सामान्य अध्ययन पेपर – III प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
संदर्भ
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊँचाई देने के लिए लंबे समय से लंबित 'मुक्त व्यापार समझौते' (FTA) पर सहमति बन गई है। वर्ष 2013 में गतिरोध के कारण रुकी हुई यह वार्ता पिछले कुछ वर्षों से पुनः सक्रिय हुई थी। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा है और यूरोपीय संघ अपने व्यापारिक भागीदारों में विविधता लाना चाहता है। यह समझौता न केवल व्यापार, बल्कि निवेश और भौगोलिक संकेतकों (GI) को भी कवर करता है।
"परिपक्व और व्यावहारिक" दृष्टिकोण
इस समझौते को 'परिपक्व और व्यावहारिक' इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि दोनों पक्षों ने कट्टर रुख अपनाने के बजाय 'बीच का रास्ता' निकाला है:
- व्यावहारिकता: भारत ने अपनी संवेदनशीलता (जैसे डेयरी और कृषि) को सुरक्षित रखा, जबकि यूरोपीय संघ ने भी अपने हितों से समझौता किए बिना लचीलापन दिखाया।
- परिपक्वता: पूर्व के विवादित मुद्दों (जैसे ऑटोमोबाइल और शराब) पर अड़ने के बजाय, दोनों देशों ने कोटा-आधारित समाधान खोजा, जो दोनों की घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षा प्रदान करता है।
चर्चा में क्यों?
यह विषय वर्तमान में वैश्विक व्यापार जगत में चर्चा का केंद्र है क्योंकि:
- व्यापारिक आकार: यूरोपीय संघ भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है (कुल व्यापार का लगभग 12%)।
- भू-राजनीतिक प्रभाव: अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक अस्थिरता के बीच यह समझौता भारत को एक स्थिर और बड़ा बाजार सुनिश्चित करता है।
- ऐतिहासिक कदम: पिछले चार वर्षों में भारत द्वारा हस्ताक्षरित यह नौवां FTA है, लेकिन आर्थिक प्रभाव के मामले में यह सबसे विशाल है।
वार्ता की सफलता के प्रमुख स्तंभ
इस समझौते की सफलता के पीछे निम्नलिखित मुख्य बिंदु रहे हैं:
- टैरिफ रियायतें: यूरोपीय संघ द्वारा 99.5% भारतीय वस्तुओं पर शून्य शुल्क की सहमति।
- ऑटोमोबाइल समाधान: लग्जरी कारों के लिए कोटा-आधारित पहुंच, जिससे भारत के छोटे कार निर्माताओं को नुकसान न हो।
- वाइन और स्पिरिट्स: फ्रांसीसी वाइन के लिए बाजार खोलना और भारतीय घरेलू शराब उद्योग को संरक्षण देना।
- रणनीतिक तालमेल: व्यापार के साथ-साथ रक्षा, प्रौद्योगिकी और मोबिलिटी (आवाजाही) पर अलग से समझौतों ने विश्वास का माहौल बनाया।
चुनौतियाँ और चिंता के विषय
सफलता के बावजूद कुछ गंभीर चुनौतियां बरकरार हैं:
- CBAM (कार्बन टैक्स): यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म भारतीय धातु निर्यात (लोहा, स्टील) के लिए चुनौती बन सकता है।
- अनुपालन: भारत को यूरोपीय मानकों के अनुरूप अपने विनिर्माण गुणवत्ता को बढ़ाना होगा।
- धीमी प्रक्रिया: समझौते को 27 भाषाओं में अनुवादित करना और यूरोपीय संसद से मंजूरी मिलना एक समय लेने वाली प्रक्रिया है।
- कृषि और श्रम मानक: पर्यावरण और श्रम मानकों को लेकर यूरोपीय संघ की सख्त शर्तें भारतीय निर्यातकों के लिए जटिल हो सकती हैं।
विश्लेषण
यह FTA भारत की 'एक्ट ईस्ट' और 'वेस्ट' दोनों नीतियों के बीच एक संतुलन है। जहाँ पिछले समझौते (जैसे UAE, ऑस्ट्रेलिया) छोटे थे, वहीं EU के साथ समझौता भारत को वैश्विक 'वैल्यू चेन' के शीर्ष पर ले जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ सेवा क्षेत्र (Services) और श्रम-गहन क्षेत्रों (जैसे कपड़ा और रत्न) को होगा। हालांकि, भारत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी जल्दी अपने आंतरिक सुधारों (Ease of Doing Business) को लागू करता है।
आगे की राह
- विनिर्माण में तेजी: भारत को 'PLI स्कीम' जैसी योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करना होगा।
- राजनयिक दबाव: भारत को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत जारी रखनी चाहिए ताकि अनुमोदन प्रक्रिया में देरी न हो।
- गुणवत्ता उन्नयन: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को यूरोपीय गुणवत्ता मानकों के प्रति प्रशिक्षित करना अनिवार्य है।
निष्कर्ष
भारत-यूरोपीय संघ FTA आर्थिक कूटनीति की एक बड़ी जीत है। यह सौदा दर्शाता है कि भारत अब एक 'रक्षात्मक' अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक 'आत्मविश्वासी' वैश्विक शक्ति के रूप में वार्ता कर रहा है। यदि इसे सही समय पर लागू किया जाता है, तो यह न केवल भारत के $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को अपरिहार्य बना देगा।
सामान्य अध्ययन पेपर – II शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध
सामान्य अध्ययन पेपर – III प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
संदर्भ
भारत अपनी विविध भौगोलिक स्थिति, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 'अतिथि देवो भव' की अवधारणा हमारी संस्कृति का मूल रही है। हालांकि, वर्तमान वैश्विक पर्यटन बाजार में भारत की स्थिति उसकी क्षमता के अनुरूप नहीं है। वर्ष 2025 के आंकड़े दर्शाते हैं कि एक विशाल देश होने के बावजूद, भारत विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में सिंगापुर और थाईलैंड जैसे छोटे देशों से काफी पीछे है।
"खूबसूरत बनाम कार्यात्मक" क्या है?
इस लेख के संदर्भ में "खूबसूरत" का अर्थ भारत की प्राकृतिक सुंदरता, विरासत और विविधता से है, जो पर्यटकों को लुभाती है। वहीं "कार्यात्मक" का अर्थ उन बुनियादी सुविधाओं से है जो एक पर्यटक की यात्रा को सुगम बनाती हैं:
- छवि: एक सुरक्षित और स्वच्छ देश के रूप में वैश्विक धारणा।
- बुनियादी ढांचा: हवाई अड्डों से लेकर स्मारकों तक निर्बाध कनेक्टिविटी और विश्व स्तरीय सुविधाएं।
- अनुभव: परेशानी मुक्त परिवहन, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और पर्यटकों की सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
अगस्त 2025 तक के तुलनात्मक आंकड़े भारतीय पर्यटन की चिंताजनक स्थिति को स्पष्ट करते हैं:
- पर्यटक संख्या: भारत में 56 लाख विदेशी पर्यटक आए, जबकि छोटे से देश सिंगापुर में 1.16 करोड़।
- राजस्व: थाईलैंड ने पर्यटन से $60 बिलियन से अधिक की कमाई की, जबकि भारत की कमाई इसका एक तिहाई भी नहीं रही।
- आबादी बनाम आकर्षण: 1.4 अरब की आबादी और विशाल क्षेत्रफल के बावजूद, भारत वैश्विक पर्यटन बाजार में अपनी सही हिस्सेदारी हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान: पर्यटन भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है। आंकड़ों के अनुसार, यह सेक्टर भारत की कुल जीडीपी में लगभग 7% से 9% तक का योगदान देता है। इसमें होटल, परिवहन, मनोरंजन और भोजन जैसे सहायक उद्योग शामिल हैं।
- रोजगार सृजन : पर्यटन क्षेत्र भारत में रोजगार देने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है।
- यह प्रत्यक्ष (जैसे- गाइड, होटल कर्मचारी, ट्रैवल एजेंट) और अप्रत्यक्ष (जैसे- हस्तशिल्प विक्रेता, स्थानीय परिवहन चालक, किसान) दोनों तरह से लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
- पर्यटन की विशेषता यह है कि यह अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल—तीनों प्रकार के श्रमिकों को काम देता है।
- विदेशी मुद्रा की प्राप्ति: विदेशी पर्यटक जब भारत आते हैं, तो वे आवास, भोजन और खरीदारी पर खर्च करते हैं, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा (जैसे डॉलर, यूरो) प्राप्त होती है। यह देश के भुगतान संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- बुनियादी ढांचे का विकास : पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए सरकार सड़कों, हवाई अड्डों, रेलवे और दूरसंचार सुविधाओं में निवेश करती है। यह विकास न केवल पर्यटकों के लिए होता है, बल्कि स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में भी सुधार लाता है। उदाहरण के लिए, 'उड़ान' (UDAN) योजना ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया है।
- सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण: पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा ऐतिहासिक स्मारकों (जैसे ताजमहल, लाल किला) और वन्यजीव अभयारण्यों (जैसे काजीरंगा, मानस) के रखरखाव पर खर्च किया जाता है। इससे हमारी विरासत सुरक्षित रहती है।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास:पर्यटन अक्सर दूरदराज के क्षेत्रों (जैसे लद्दाख, उत्तर-पूर्व भारत या केरल के बैकवाटर्स) में फैला होता है। यह उन क्षेत्रों में पैसा और सुविधाएं पहुँचाता है जहाँ बड़े उद्योग नहीं लग सकते, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होती है।
- भारत की 'सॉफ्ट पावर' :जब विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और आतिथ्य का अनुभव करते हैं, तो इससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि मजबूत होती है। 'अतिथि देवो भव' की भावना अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाती है।
सरकार द्वारा उठाये गए कदम
- प्रमुख बुनियादी ढांचा योजनाएं
- स्वदेश दर्शन योजना: इसके तहत देश में 'थीम-आधारित' पर्यटन सर्किट (जैसे– रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट, तटीय सर्किट) विकसित किए जा रहे हैं। इसका नया संस्करण 'स्वदेश दर्शन 2.0' अब गंतव्य-केंद्रित विकास पर जोर दे रहा है।
- प्रसाद योजना : इसका पूरा नाम 'पिलग्रिमेज रिजुवेनेशन एंड स्पिरिचुअल ऑगमेंटेशन ड्राइव' है। इसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों (जैसे– वाराणसी, मथुरा, केदारनाथ) का कायाकल्प करना और वहां बुनियादी सुविधाएं बढ़ाना है।
- उड़ान योजना : इस योजना ने दूर-दराज के पर्यटन स्थलों तक हवाई पहुँच को सस्ता और सुलभ बनाया है, जिससे 'टियर-2' और 'टियर-3' शहरों में पर्यटन बढ़ा है।
- नीतिगत और डिजिटल पहल
- ई-विजा (e-Visa) सुविधा: भारत ने 160 से अधिक देशों के नागरिकों के लिए ई-पर्यटक वीजा की सुविधा शुरू की है, जिससे भारत आना अब बहुत सरल हो गया है।
- अतिथि देवो भव और अतुल्य भारत: वैश्विक स्तर पर भारत की ब्रांडिंग के लिए 'अतुल्य भारत 2.0' अभियान चलाया जा रहा है, जो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केंद्रित है।
- देखों अपना देश: कोविड-19 के बाद घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह अभियान शुरू किया गया, जिसमें नागरिकों को अपने देश की विविधता देखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- विशेष पर्यटन क्षेत्र और नवाचार
- चिकित्सा पर्यटन: भारत ने 'हीलम इन इंडिया' पहल के माध्यम से चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा दिया है, जिसमें आयुष (आयुर्वेद, योग) और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए विदेशी पर्यटकों को विशेष 'आयुष वीजा' दिया जा रहा है।
- क्रूज पर्यटन: गंगा विलास (दुनिया की सबसे लंबी रिवर क्रूज) और तटीय क्षेत्रों में क्रूज टर्मिनलों का विकास किया जा रहा है ताकि इस उच्च-मूल्य वाले क्षेत्र को बढ़ावा मिले।
- एडवेंचर और इको-टूरिज्म: हिमालयी क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व भारत में साहसिक खेलों और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं।
- निवेश और व्यवसाय सुगमता
- 100% FDI: पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है।
- होटल क्षेत्र को बुनियादी ढांचे का दर्जा: बड़े होटल प्रोजेक्ट्स को 'इंफ्रास्ट्रक्चर' का दर्जा देने की मांग पर विचार किया जा रहा है ताकि उन्हें कम ब्याज पर ऋण मिल सके।
- कौशल विकास और सुरक्षा
- हुनर से रोजगार तक: इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को होटल मैनेजमेंट, गाइड और कैटरिंग जैसे क्षेत्रों में अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- पर्यटक पुलिस और हेल्पलाइन: पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई राज्यों में विशेष 'पर्यटन पुलिस' की तैनाती की गई है और 1363 मल्टीलिंगुअल हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।
पर्यटन क्षेत्र की सफलता के मार्ग में बाधाएं
भारत की पर्यटन रणनीति में कुछ गहरे 'रोग' हैं:
- सुरक्षा की चिंता: विदेशी पर्यटकों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर बनी धारणा।
- साफ-सफाई का अभाव: पर्यटन स्थलों पर कचरा प्रबंधन और स्वच्छता की कमी।
- जटिल प्रक्रियाएं: वीजा, परिवहन और टिकट बुकिंग में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं।
- अति-वाणिज्यीकरण: पर्यटकों से अधिक पैसे वसूलने की प्रवृत्ति, जो उनके अनुभव को खराब करती है।
विश्लेषण
पर्यटन केवल स्मारकों को दिखाना नहीं है, बल्कि एक 'एंड-टू-एंड' अनुभव प्रदान करना है। थाईलैंड और सिंगापुर की सफलता का राज उनकी "कार्यात्मकता" में है। वहां एक पर्यटक को हवाई अड्डे से होटल और पर्यटन स्थल तक जाने में किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। भारत के पास 'कंटेंट' (सुंदरता और इतिहास) तो है, लेकिन 'डिलीवरी' (सेवा और सुविधा) में हम पीछे रह जाते हैं। जब तक बुनियादी ढांचा और सुरक्षा विश्व स्तरीय नहीं होगी, भारत केवल एक "लुभावना विचार" ही बना रहेगा।
आगे की राह
- डिजिटलीकरण और सुगमता: पर्यटकों के लिए एक एकल खिड़की ऐप, जो परिवहन, गाइड और आपातकालीन सहायता प्रदान करे।
- स्वच्छता अभियान: प्रमुख पर्यटन केंद्रों को 'जीरो-वेस्ट' जोन के रूप में विकसित करना।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: 'पर्यटन पुलिस' को अधिक सशक्त और मित्रवत बनाना ताकि विदेशी पर्यटकों में विश्वास पैदा हो।
- ब्रांडिंग में बदलाव: केवल 'इनक्रेडिबल इंडिया' दिखाने के बजाय 'सेफ एंड सीमलेस इंडिया' पर ध्यान केंद्रित करना।
निष्कर्ष
भारत की सुंदरता निर्विवाद है, लेकिन पर्यटन उद्योग को फलने-फूलने के लिए केवल सुंदरता पर्याप्त नहीं है। हमें 'खूबसूरत भारत' से आगे बढ़कर 'कार्यात्मक भारत' बनने की दिशा में काम करना होगा। यदि हम अपनी बुनियादी कमियों को दूर कर लेते हैं, तो पर्यटन क्षेत्र न केवल विदेशी मुद्रा का भंडार बनेगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।